समाचार एजेन्सी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान की सरकार तालेबान से होने वाली शांति वार्ता के विफल होने की स्थिति में चाहती है कि भारत सैनिक सहायता के अलावा उसके सैनिकों को भी प्रशिक्षण दे।
भारत में अफगानिस्तान के राजदूत ने घोषणा की है कि अगले वर्ष भारत से अधिक सैनिक मदद की ज़रूरत पड़ सकती है किन्तु इसका मतलब भारतीय सैनिकों को अफगानिस्तान भेजना नहीं है।
भारत के विदेशमंत्री यस जय शंकर ने अपने अफगान समकक्ष मोहम्मद हनीफ अतमर से कल ताजिकिस्तान में मुलाकात की थी।
ज्ञात रहे कि अफगानिस्तान में लड़ाई तेज़ हो जाने के बाद भारत अब तक कंधार में अपने काउंसलेट से 50 कूटनयिकों और सुरक्षा बलों को निकाल चुका है।
भारत अफगानिस्तान में शांति व सुरक्षा स्थापित करने वालों का एक मुख्य घटक रहा है और अब तक वह अफगानिस्तान की तीन अरब डॉलर की सहायता कर चुका है।